होनहार बिरवान के होत चीकने पात इस कहावत पर प्रेमचंद जी ने एक साहित्यिक नाटक लिखा है। इस कहावत का अर्थ है कि जो होनहार (प्रतिभाशाली) लोग होते हैं, उनके ढंग और गुण ही निराले होते हैं। वह मामूली लोगों से अपनी सोच के बल से अलग दिखते हैं। (बिरवान = पेड़, पात = पत्ते)
हौआ = (Scare crow) चिड़िया को भागने के लिए खड़ा किया जाने वाला पुतला हौआ से चिड़िया को बहुत डर लगता है पर असलियत मैं वो कुछ भी भी नहीं बिगाड़ सकता चिड़िया का |
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