ढाक एक पेड़ का नाम होता है और ढाक के तीन पात का मतलब बहुत कम पत्तों के पेड़ के लिए होता है। बिना पत्तों का पेड़ किसी काम का नही होता। वह छाया नहीं दे सकता। ----- https://hi.quora.com/%E0%A4%A2%E0%A4%BE%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE “ढाक के तीन पात, ” इस मुहावरे का प्रयोग ऐसी स्थिति को बयां करने के लिए किया जाता है जहां हम शून्य बदलाव देखते हैं या साधारण भाषा में कहें तो ‘ एक समान रहना’ यह इसका अर्थ है। इसका वाक्य में इस प्रकार प्रयोग किया जाता है - हिंदुस्तान में कई सरकारें आईं और गईं पर स्थिति वही ढाक के तीन पात। इस लड़के के सभी साथी कहां-कहां पहुंच गए हैं, पर यह वही है ढाक के तीन पात। जहां तक इसकी उत्पत्ति की बात है, यह शायद इसलिए हुई क्योंकि ढाक के पात यानी पत्ते एक साथ तीन के समूह में होते हैं। ढाक को ‘पलाश’और ‘टेसू’ नाम से भी जाना जाता है। इस वृक्ष की विकास दर भी धीमी होती है, शायद इन्हीं का...
अपनी गरज बावली इसका अर्थ बहुत ही सरल है अपनी मतलब खुद की , गरज मतलब काम , बावली मतलब पागल । सीधा सा अर्थ यह है कि हम अपने स्वयं के काम को करने के लिए बहुत आतुर रहते है । मतलब मेरा कोई काम है जो जल्दी हो जाये । उदाहरण के तौर पर ऐसे समझ सकते है कि हम किसी दुकान पर कुछ सामान खरिदने गए , और वहाँ पर बहुत भीड़ है , तो हम अपना सामान लेने के लिए जल्दी करते है , कि जल्दी से जल्दी मेरा सामान मुझे मिल जाये ।
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